मोदी सरकार का एक और मास्टर स्ट्रोक, ब्रिटेन ने दी माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी

मोदी सरकार का एक और मास्टर स्ट्रोक, ब्रिटेन ने दी माल्या के प्रत्यर्पण को मंजूरी

आर्थिक भगोड़े विजय माल्या पर मोदी सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है. भारत सरकार के अथक प्रयासों से ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जाविद ने भगोड़े शराब कारोबारी...

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आर्थिक भगोड़े विजय माल्या पर मोदी सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है. भारत सरकार के अथक प्रयासों से ब्रिटेन के गृह सचिव साजिद जाविद ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के भारत को प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी है. ब्रिटेन ने माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश जारी करने से पहले इस मामले से जुड़े सभी मुद्दों पर गहन जांच की और 3 फरवरी को प्रत्यर्पण के आदेश पर हस्ताक्षर किये.विजय माल्या

गौरतलब है की विजय माल्या पर भारतीय बैंकों का नौ हज़ार रूपए से अधिक का बकाया है. जांच के दौरान माल्या मार्च 2016 में देश से लंदन भाग गया था. पिछले साल डिसेम्बर में लंदन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने विजय माल्या को भारत भेजे जाने का फैसला सुनाया था जिसके बाद उम्मीदें तेज हो गयी थीं. लेकिन जिस तरह से विजय माल्या के पास अपर कोर्ट में जाने का विकल्प था उसके बाद सरकार चाहती है कि विजय माल्या पर लंदन की कोर्ट और सरकार जल्द से जल्द फैसले का निपटारा करे.

जाँच के दौरान भारत की जाँच एजेंसियों के दिए सबूतों को सही मानते हुए लंदन के कोर्ट ने विजय माल्या को मनी लांड्रिंग का आरोपी माना. उसके आधार पर लंदन कोर्ट ने उसे भारत को सौंपे जाने का फैसला सुनाया. अब मुंबई की अदालत नें नये कानून के तहत विजय भगोड़ा आर्थिक अपराध कानून 2018 के तहत भगौड़ा घोषित किया है. इस फैसले को आधार बना कर जांच एजेंसियां विजय माल्या को भारत लाने की कोशिशें तेज करेगी.विजय माल्या

मामले में भारत की ओर से क्राउन प्रोसक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के प्रवक्ता ने कहा की इस मामले पर गौर करने के बाद गृह मंत्री को लगता है कि प्रत्यर्पण को हरी झंडी दी जा सकती है तो इसके लिए उनके पास दो महीने का समय होगा. प्रवक्ता ने कहा, ‘उनके फैसले के बाद हारने वाला पक्ष 14 दिन के भीतर उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है.’

 

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