क्या है केंद्र की परिभाषा और उत्तरदायित्व? इंटरव्यू में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या है केंद्र की परिभाषा और उत्तरदायित्व? इंटरव्यू में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र की परिभाषा के विषय में बहुत कम लोगों को जानकारी है. इंटरव्यू के दौरान ऐसे सामान्य सवाल किये जा सकते हैं. जो लोग परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुए...

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केंद्र की परिभाषा के विषय में बहुत कम लोगों को जानकारी है. इंटरव्यू के दौरान ऐसे सामान्य सवाल किये जा सकते हैं. जो लोग परीक्षाओं की तैयारी में लगे हुए है उनके लिए भी ये जानना आवश्यक है. क्योंकि किसी भी जानकारी को विस्तार से जानने के लिए उससे संबंधित बेसिक जानकारी होना जरूरी हैं.

What is the definition and responsibility of the Center:

सामान्य शब्दों में कहें भारत देश की सरकार आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार के रूप में जानी जाती है. जिसे सन 1950 में भारत के संविधान की और से स्थापित किया गया था. भारत देश के 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों की शासी निकाय ही केंद्र सरकार है. जिसको सामूहिक तौर पर भारत गणराज्य कहते है.

केंद्र सरकार के स्थान की बात करें तो वह भारत देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित हैं.What is the definition and responsibility of the Center

संविधान द्वारा बनाये गये संयुक्त ढांचे के तहत केंद्र और राज्य सरकार अपने कामकाज में स्वतंत्र है. फिर भी यदि कोई आपातकालीन स्थिति अथवा आपदा से निपटना हो तो कुछ सर्वसम्मत निर्णय लिए जाते है जिनको देश के राष्ट्रीय हित के लिए केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित या निर्देशित किया जाता है.

भारत की केंद्र सरकार की मूल संरचना की बात करें तो संविधान में लिखित उल्लेख में भारतीय केंद्र सरकार को तीन प्रमुख वर्गों में बांटा गया हैं. सरकार के प्रत्येक विभाग की शक्ति अलग निर्धारित की गई हैं. देश के समुचित कार्य के लिए प्रत्येक विभाग को विभिन्न भूमिकाएं और जिम्मेदारियां दी गई है.

प्रमुख कार्यकारी इस प्रकार है- राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और कैबिनेटमंत्री.

विधानसभा को शक्ति के आधार पर इस प्रकार बनाया गया है- संसद, लोकसभा, राज्यसभा.What is the definition and responsibility of the Center

न्यायपालिका की बात करें तो उसे भी अलग-अलग इस प्रकार किया हुआ है- भारत का सर्वोच्च न्यायालय, राज्य स्तर पर भारत के उच्च न्यायालय, जिला स्तर पर जिला न्यायालय और सत्र न्यायालय.

उत्तरदायित्व

केंद्र सरकार के कार्यकारी शाखा में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, कैबिनेटमंत्री के आलावा स्वतंत्र कार्यकारी एजेंसियां शामिल है. जिसमें देश के राष्ट्रपति राज्य के प्रमुख है और विभाग राष्ट्रपति द्वारा अपनी शक्तियों को कार्यान्वित करता है, जिसकी जिम्मेदारी कानून संभालना और लागू करना हैं. अर्थात् कार्यकारी विभाग कानून पारित अथवा व्याख्या नहीं करता है.

हालांकि इसके द्वारा विधानसभा द्वारा तैयार किए गए कानूनों को लागू किया जाता है और व्याख्या न्यायपालिका करती हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें की केंद्र सरकार के कार्यकारी विभाग देश के कुछ ही कानूनों का स्रोत हो सकता है. क्योंकि सरकार की इस शाखा के पास राज्य प्रशासन के दैनिक प्रशासन और कार्य के लिए एकमात्र अधिकार और जिम्मेदारी हैं.

विधानसभा की शाखा को संसद के रूप में भी जाना जाता है. भारतीय संसद जो की विधानसभा की शाखा का मुख्य घटक है, उसमें दो सदन हैं जिन्हें लोकसभा (लोक परिषद) और राज्यसभा (राज्य परिषद) और राष्ट्रपति संसद या विधानसभा प्रमुख है.

ये शाखा कानून और नीति का निर्माण करती है जो संपूर्ण देश पर लागू होती है. विधानसभा की शाखा संसदीय वर्चस्व प्राप्त करती है फिर भी पूर्ण संप्रभुता नहीं है. कार्यकारी शाखा पर कुछ नियंत्रण होते है इनकी जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं-

केंद्र सरकार के लिए सभी प्रमुख कानूनों का प्रारूपण तैयार करना, संसद में पेश किए जाने वाले बिलों पर निर्णय लेना, राष्ट्रपति द्वारा घोषित किए जाने वाले आदेश को मानना, संघ शासित प्रदेशों के लिए राष्ट्रपति द्वारा किए जाने वाले विनियम, चुनाव कानूनों का निर्धारण करना, राष्ट्रपति शासन के तहत राज्यों के लिए किए जाने वाले उपाय और निजी कानून, अनुबंध, साक्ष्य जैसे कुछ मामलों का निपटारा करना है.

बता दें विधानसभा पूर्ण संप्रभुता का आनंद नहीं लेती है क्योंकि इसके कानून न्यायपालिका या भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यायिक समीक्षा के अधीन होते है.

न्यायपालिका भारतीय सर्वोच्च न्यायालय भारत में अंतिम न्यायिक प्राधिकरण है जो देश की कानून व्यवस्था को बनाए रखने और प्रसार का कार्य करती है.

जिम्मेदारी-

कानूनों की व्याख्या करना, न्यायिक समीक्षा करना, और संविधान के मुताबिक कानूनों का पालन करना है. इसके अलावा न्यायिक समीक्षाओं को सुलझाना, अदालत के फैसले और कानून के सामने प्रत्येक व्यक्ति की समानता सुनिश्चित करना है. साथ ही साथ इसके द्वारा कार्यकारी और विधान मंडल के बीच संघर्ष और अन्य सार्वजनिक संबंधित मामलों या संघर्ष को हल किया जाता हैं.

केंद्र की शक्ति-

सभी राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुपालन में अपनी कार्यकारी शक्ति का प्रयोग करना चाहिए.

राज्य सरकार के भीतर केंद्र सरकार की कार्यकारी शक्ति पर कोई राज्य सरकार रोक नहीं लगा सकता है.

केंद्र सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मामले में राज्य पर अधिकार भी प्राप्त है.

केंद्र सरकार राज्यों और विदेशी व्यापार के बीच व्यापार और व्यापारिक विषयों का विनियमित करती हैं. साथ ही साथ इसमें युद्ध घोषित करने, सेना को ऊपर उठाने और बनाए रखने की शक्ति भी हैं. केंद्र सरकार के पास सभी उपाय करने की शक्ति जो पर्यावरण की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने और सुधार करने और प्रदूषण को रोकने और नियंत्रित करने के उद्देश्य के लिए अति आवश्यक हैं.

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