वास्तु क्या होता है और इसका हमारे लिए क्या महत्व है? जानिए वास्तुशास्त्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

वास्तु क्या होता है और इसका हमारे लिए क्या महत्व है? जानिए वास्तुशास्त्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

आपने वास्तु का नाम तो जरुर सुना ही होगा. जब भी भवन निर्माण और वित्तीय लाभ हानि की बात आती है तो वास्तु की चर्चा अनायास ही आ जाती है. आज हम आपसे वास्तु...

आओ वास्तु सीखें-3: प्राकृतिक शक्तियों के संतुलन से अपने भाग्य के निर्माता स्वयं बने
आओ वास्तु सीखें (How to Learn Vastu)-1: वास्तु के अनुसार किस दिशा में कौन सा तत्व होना चाहिए
आओ वास्तु सीखें भाग 4: वास्तु में ढलान का महत्व, सही दिशा में ढलान करेगी आपको मालामाल

आपने वास्तु का नाम तो जरुर सुना ही होगा. जब भी भवन निर्माण और वित्तीय लाभ हानि की बात आती है तो वास्तु की चर्चा अनायास ही आ जाती है. आज हम आपसे वास्तु से जुड़ी हर बात पर चर्चा तो करेंगे ही बल्कि इसके साथ ही इसका लाभ आप अपने जीवन में अधिकाधिक उठा सकें, इसके लिए आपको वास्तु सिखाने के लिए एक मुफ्त कोर्स (what is vastu) भी शुरु करने जा रहे हैं. आप बस थोड़े से अभ्यास से ही वास्तु विज्ञान में पारंगत हो जायेंगे. इसके लिए आप हमारी सारी पोस्ट नियमित चेक करते रहें.what is vastu

वास्तु क्या है? (what is vastu)

वास्तु शब्द का अर्थ ही निवास स्थान होता है. जिस तरह हमारा शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है वैसे ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड और इस चराचर जगत में भी इन तत्वों का विशेष स्थान है. इस भौतिक संसार में रहने के लिए इस सभी तत्वों का तालमेल रहना बहुत जरुरी है. बिना तालमेल के, किसी भी तत्व के कम या अधिक हो जाने से असंतुलन हो जाता है जिसके परिणाम हमारे अनुकूल नहीं होते. उसी तरह इस प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए विविध प्राकृतिक तत्वों जैसे जल, पृथ्वी, वायु, अग्नि और आकाश के बीच परस्पर क्रिया होती है, जिसका व्यापक प्रभाव इस पृथ्वी पर रहने वाली मनुष्य जाति के अलावा अन्य प्राणियों पर पड़ता है. इन पांच तत्वों के बीच होने वाली परस्पर क्रिया को वास्तु के नाम से जाना जाता है. वास्तु ज्योतिष के अनुसार इस प्रक्रिया का प्रभाव हमारे कार्य प्रदर्शन, स्वभाव, भाग्य एवं जीवन के अन्य पहलुओं पर पड़ता है.

भारत की प्राचीनतम विद्याओं में से एक है वास्तु, जिसका संबंध दिशाओं और ऊर्जाओं से है. इसके अंतर्गत दिशाओं को आधार बनाकर आसपास मौजूद नकारात्मक ऊर्जाओं को कुछ इस तरह सकारात्मक किया जाता है, ताकि वह मानव जीवन पर अपना प्रतिकूल प्रभाव ना डाल सकें. दुनिया के पहले विद्वान वास्तुविद् विश्वकर्मा के अनुसार शास्त्र सम्मत निर्मित भवन विश्व को सम्पूर्ण सुख, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति कराता है. वास्तु शिल्पशास्त्र का ज्ञान मृत्यु पर भी विजय प्राप्त कराकर लोक मे परमानन्द उत्पन्न करता है, अतः वास्तु शिल्प ज्ञान के बिना निवास करने का संसार मे कोई महत्व नहीं है. वास्तु एक प्राचीन विज्ञान है जो हमारे ऋषि-मुनियों के उच्च परिशोध के रूप में हमारे सामने है.

हमारे जीवन में वास्तु का महत्व

वास्तु विज्ञान हमारे जीवन में गलत चीजों से रक्षा करने और हमारे जीवन को बेहतर बनाने में हमारी सहायता करता है. यानी वास्तु शास्त्र हमें नकारात्मक तत्वों से होने वाले नुकसान से दूर सुरक्षित वातावरण में रहने में मदद करता है. वास्तु विज्ञान में वास्तुकला के सिद्धांत और दर्शन सम्मिलित है, जो एक भवन निर्माण के लिए सबसे अधिक महत्व की बात है. इसका प्रभाव हमारी जीवन शैली और रहन-सहन पर व्यापक रूप से पड़ता है. वास्तु का आधार सभी प्रकार की प्राकृतिक ऊर्जाओं पर निर्भर होता है और ये हमें प्रकृति द्वारा मुफ्त में ही उपलब्ध है.

वास्तु के ऊर्जा स्रोत

वास्तु मुख्य रूप से पृथ्वी, सूर्य, आकाश, वायु और ब्रह्मांड तथा चन्द्रमा से ऊर्जा प्राप्त करता है. इसके अलावा इसके ऊर्जा स्रोत में चुंबकीय, थर्मल और विद्युत ऊर्जा भी शामिल होती है. जब हम इन सभी ऊर्जाओं का आनन्दमय उपयोग करते हैं, तो यह हमें अत्यंत आंतरिक खुशी, मन की शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए धन प्रदान करती हैं. वास्तु को किसी भी प्रकार के कमरे, घर, वाणिज्यिक या आवासीय संपत्ति, बंगले, विला, मंदिर, नगर नियोजन आदि के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.what is vastu

वास्तु दोष और निवारण

वास्तु के नियम के अनुसार जहाँ पूर्ण सद्भाव और शांति होगी वहां ये तीनों बल अपनी सही जगह पर स्थित होंगे. अगर इन तीन बलों की जगह में आपसी परिवर्तन यानी गड़बड़ी होती है, जैसे कि जल की जगह वायु या अग्नि को रखा जाए तथा अन्य ताकत का गलत स्थानांतरण हो तो इस गलत संयोजन का जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण सद्भाव की कमी एवं अशांति पैदा होती है. वास्तु के अनुसार हर तरह की शक्ति या ऊर्जा के लिए एक नियत जगह निर्धारित की हुई होती है और उनके सही जगह में फेर बदल से वास्तु बिगड़ जाता है और फिर उसे नियत जगह पर स्थापित करना वास्तु दोषों का निवारण कहलाता है. कई बार किसी कारणवश किसी एक दोष की गड़बड़ी को सुधार पाने के असमर्थता के चलते दुसरे किसी उपाय के द्वारा उसके दुष्प्रभाव को कम करना पड़ता है.

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