बैंक में लगा है ‘लंच ब्रेक’ का बोर्ड तो ये है आपके अधिकार, ले सकते हैं मुआवजा भी

बैंक में लगा है ‘लंच ब्रेक’ का बोर्ड तो ये है आपके अधिकार, ले सकते हैं मुआवजा भी

कई बार जब हम बैंक में जाते है तो ‘लंच ब्रेक’ का बोर्ड लगा नज़र आ जाता है और बैंक कर्मी आपको कुछ देर बाद आने का बोलकर टरका देते हैं. कई बार कस्टमर विनती...

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कई बार जब हम बैंक में जाते है तो ‘लंच ब्रेक’ का बोर्ड लगा नज़र आ जाता है और बैंक कर्मी आपको कुछ देर बाद आने का बोलकर टरका देते हैं. कई बार कस्टमर विनती करता रह जाता है लेकिन कर्मचारी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती और उसका कोई जरुरी काम लटक जाता है. लेकिन क्या आपको पता है की बैंक कर्मी आपको ‘लंच ब्रेक’ का कहकर खिड़की बंद नहीं कर सकते. एक RTI एक्टिविस्ट ने बैंकों से जुड़ी क्वेरी को लेकर आरबीआई से कुछ सवालों के जवाब मांगे थे.

RTI के जवाब में RBI ने जो जानकारी दी है, वे हर बैंक कस्टमर के लिए फायदेमंद है. यह सवाल उत्तराखंड हल्दवानी के बिजनेसमैन प्रमोद गोल्डी ने आरबीआई से किए थे. आइये जानते हैं की RTI में पूछे गए सवालों का RBI ने क्या जवाब दिया.Bank rules

सवाल 1. लंच टाइम का बोलकर काम बंद कर देते हैं.

जवाब: सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बिना लंच ब्रेक के सेवाएं देना बैंकों से अपेक्षित है. बैंक अधिकारी एक-एक करके लंच कर सकते हैं. इस दौरान नॉर्मल ट्रांजेक्शन चलते रहना चाहिए. अधिकतर पब्लिक सेक्टर के बैंकों में लंच टाइम का बोर्ड लगा दिया जाता है और ग्राहक लंच के नाम पर घंटों इंतजार करते हैं. लेकिन नियमों के मुताबिक ऐसा नहीं किया जा सकता.

सवाल 2. लंच ब्रेक में गेट बंद कर दिया जाता है.

जवाब: लंच ब्रेक मे बैंक गेट बंद नहीं कर सकते और कस्टमर्स को बाहर इंतजार करने का नहीं कह सकते. नियमों के मुताबिक काउंटर पर कस्टमर्स को अटेंड करने के लिए हमेशा कोई न कोई होना चाहिए. 1111 या 2222 जैसे किसी डिनोमिनेशन में डिपॉजिट लेने से कोई बैंक मना नहीं कर सकता. डिपॉजिट लेने से जुड़ी इस तरह की कोई गाइडलाइन नहीं है.

सवाल 3. ग्राहक को बैंक में क्या अधिकार मिलते हैं?

जवाब: अगर चेक कलेक्शन में देरी होती है तो कस्टमर को बैंक से मुआवजा पाने का अधिकार है. इसके अलावा RTI में बताया गया है की कस्टमर के अकाउंट से हुए अनऑथराइज्ड ट्रांजेक्शन के लिए बैंक ग्राहक को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते. सिर्फ परमानेंट एड्रेस न होने चलते कोई भी बैंक आपका अकाउंट ओपन करने से मना नहीं कर सकता.Bank rules

सवाल 4. क्या होती है बैंक की जिम्मेदारी?

जवाब: ग्राहक की निजी जानकारी को गुप्त रखना बैंक की जिम्मेदारी है. बैंक इसे किसी अन्य से शेयर नहीं कर सकता. जाति, धर्म, लिंग वगैरह के आधार पर बैंक किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकता. इसके अलावा कोई भी व्यक्ति NEFT के जरिए 50 हजार रुपए तक की रकम ट्रांसफर कर सकता है.

COMMENTS

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    Nyc post bhai

    👌👌👌